कोर्स 04- गतिविधि 3 : पालक शिक्षक संघ की बैठक में संवाद का एक सशक्त माध्यम - अपने विचार साझा करें

इन बिंदुओं पर ध्यानपूर्वक विचार करें - पालक शिक्षक संघ की बैठक कितनी अवधि में की जाती है? अभिभावकों से किस तरह की चर्चा की जाती है? यह कैसे पता लगाएं कि अभिभावक, विद्यालय और शिक्षक-शिक्षिकाओं की किस प्रकार प्रभावी मदद कर सकते हैं। क्या आपने अभिभावकों की चिंताओं तथा उनके निराकरण के उपायों के बारे में सोचा है

इन समस्याओं तथा निराकरण के उपायों के बारे में गंभीरता से चिंतन करके अपने विचार साझा करें।

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  1. इन बिंदुओं पर ध्यानपूर्वक विचार करें - पालक शिक्षक संघ की बैठक

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  2. प्रत्येक माता पिता यह उम्मीद करते है कि उनका बच्चा बेहतर शिक्षा ग्रहण करे, अच्छे संस्कार स्कूल में शिक्षक भी सिखाएं। विषय ज्ञान के लिए विद्यार्थी उत्तरदायित्व हैं लेकिन संस्कारों, वास्तविक प्रयोगशाला तो घर एवं परिवार हैं जहां बच्चों के व्यवहार एवं संस्कारों का वास्तविक प्रयोग होता है। आज का शिक्षक एवं छात्र दोनों अंकों के खेल में व्यस्त हो गए हैं। उनका एक ही लक्ष्य सर्वाधिक अंक लाकर कुछ बनने का होता है। अध्यापक भी छात्रों के सर्वांगीण विकास के स्थान पर मानसिक विकास पर केंद्रीत होता है। इस भागदौड़ में जीवन के अच्छा नागरिक या अच्छा इंसान बनाने की पहलू अछूते रह जाते हैं। हमारे समय में शिक्षक एक ईश्वर की तरह वास्तविक रूप से पूज्यनीय होते थे। आज इस स्तर में बहुत बदलाव आया हुआ है। इसके लिए हम सभी समाज के लोग जिम्मेदार हैं। आज अभिभावक शिक्षक पर अपने बच्चों से ज्यादा भरोसा नहीं करता पहले शिक्षक की बात पर विश्वास किया जाता था। पहले माता पिता अपने से ज्यादा शिक्षक को बच्चों का शुभ¨चतक मानते थे।

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  3. ज्योति नायक - कम से कम डेढ से दो महीने में शिक्षक अभिभावक की बैठक होनी चाहिये | शिक्षक को पहले बच्चे की खूबियाँ बतानी चाहिये फिर अगर बच्चे में कोई कमजोरी हो तो उसका उपाय बताते हुए अभिभावक से चर्चा करनी चाहिये |

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  4. आज का शिक्षक एवं छात्र दोनों अंकों के खेल में व्यस्त हो गए हैं। उनका एक ही लक्ष्य सर्वाधिक अंक लाकर कुछ बनने का होता है। अध्यापक भी छात्रों के सर्वांगीण विकास के स्थान पर मानसिक विकास पर केंद्रीत होता है।

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  5. कुछ बच्चों को गृहकार्य करने के लिए घर पर मार्गदर्शन भी नहीं मिलता है | इन परेशानियों से निपटने के लिए नियमित रूप से माता -पिता के साथ संवाद बनाए रखना आवश्यक है और गृहकार्य के लिए कुछ ऐसा कार्य भी दिया जा सकता है जिसमे माता - पिता की भूमिका अनिवार्य हो |

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  6. माता पिता यह उम्मीद करते है कि उनका बच्चा बेहतर शिक्षा ग्रहण करे, अच्छे संस्कार स्कूल में शिक्षक भी सिखाएं। आज का शिक्षक एवं छात्र दोनों अंकों के खेल में व्यस्त हो गए हैं। उनका एक ही लक्ष्य सर्वाधिक अंक लाकर कुछ बनने का होता है। हमारे समय में शिक्षक एक ईश्वर की तरह वास्तविक रूप से पूज्यनीय होते थे। आज इस स्तर में बहुत बदलाव आया हुआ है। इसके लिए हम सभी समाज के लोग जिम्मेदार हैं। पहले माता- पिता अपने से ज्यादा शिक्षक को बच्चों का शुभ चिंतक मानते थे

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